बुधवार, 23 दिसंबर 2009

ये मुहब्बत क्यूँ इतनी बेगैरत हो गई .....?

तुझे ढूँढने जो आया यहाँ
देखा, तेरे तो हर गली में
 इश्क के अलग-अलग किस्से हैं
बेवफा कहूँ या बेहया .....
अये खुदा ! अब तू ही बता
ये मुहब्बत क्यूँ इतनी बेगैरत हो गई .....?



2 टिप्‍पणियां:

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

वाह .....बहुत खूब .....!!

सुलभ सतरंगी ने कहा…

एक बेवफा ऊपर से बेहया हो जाये...
मोहब्बत बेगैरत होगी ही.

अच्छा लिखा है.